Raksha Bandhan 2026 Date: रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को समर्पित एक भावनात्मक और धार्मिक त्योहार है, जिसे हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र यानी राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि तथा सुरक्षा की कामना करती हैं। बदले में भाई बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं। यह परंपरा केवल पारिवारिक बंधन ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और विश्वास का भी प्रतीक मानी जाती है।

2025 और 2026 के रक्षा बंधन की तिथियों में अंतर क्यों है
साल 2025 में रक्षा बंधन का पर्व 9 अगस्त को मनाया गया था, जो अगस्त महीने के शुरुआती दिनों में आ गया था। इसी कारण कई लोगों को यह महसूस हुआ कि राखी कुछ जल्दी आ गई। लेकिन वर्ष 2026 में स्थिति अलग है, क्योंकि इस बार श्रावण पूर्णिमा अगस्त महीने के अंतिम दिनों में पड़ रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार पर्व की तिथि चंद्रमा की गति पर आधारित होती है, इसलिए हर वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर में त्योहारों की तारीख बदलती रहती है। यही कारण है कि रक्षा बंधन 2026, 2025 की तुलना में काफी बाद में मनाया जाएगा।
रक्षा बंधन 2026 की सही तिथि और वार
हिंदू पंचांग के अनुसार रक्षा बंधन का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जिसे सावन पूर्णिमा भी कहा जाता है। वर्ष 2026 में सावन पूर्णिमा की तिथि 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से प्रारंभ होगी और 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। चूंकि पर्व मनाने के लिए उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए रक्षा बंधन 2026 का त्योहार शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इसी दिन पूरे विधि-विधान से राखी बांधने की परंपरा निभाई जाएगी।
उदया तिथि के आधार पर पर्व मनाने की परंपरा
सनातन परंपरा में किसी भी व्रत या पर्व की तिथि निर्धारित करने में उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। इसका अर्थ है कि जिस तिथि का सूर्योदय के समय अस्तित्व होता है, उसी दिन पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में पूर्णिमा तिथि का सूर्योदय 28 अगस्त को हो रहा है, इसलिए यही दिन रक्षा बंधन के लिए धार्मिक रूप से मान्य माना जाएगा। इसी नियम के कारण कभी-कभी त्योहारों की तारीखें लोगों को भ्रमित कर देती हैं, लेकिन पंचांग के अनुसार उदया तिथि ही अंतिम निर्णय मानी जाती है।
रक्षा बंधन 2026 में राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
रक्षा बंधन पर राखी बांधते समय शुभ मुहूर्त का पालन करना धार्मिक दृष्टि से लाभकारी माना जाता है। वर्ष 2026 में 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस प्रकार बहनों को लगभग तीन घंटे इक्यावन मिनट का समय मिलेगा, जिसमें वे बिना किसी अशुभ योग के भाइयों को राखी बांध सकती हैं। इस अवधि में ग्रहों की स्थिति भी अनुकूल मानी जा रही है, जिससे रक्षा सूत्र का प्रभाव और भी मंगलकारी माना जाता है।
रक्षा बंधन पर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
रक्षा बंधन केवल एक पारिवारिक परंपरा नहीं, बल्कि इसका गहरा संबंध भारतीय संस्कृति और धार्मिक विश्वासों से भी जुड़ा हुआ है। पुराणों और धार्मिक कथाओं में कई ऐसे प्रसंग मिलते हैं जहां रक्षा सूत्र ने संकट के समय रक्षा का कार्य किया। देवताओं और दानवों के युद्ध में इंद्राणी द्वारा इंद्र को बांधा गया रक्षा सूत्र इसका प्रसिद्ध उदाहरण माना जाता है। इसी तरह द्रौपदी और श्रीकृष्ण की कथा भी इस पर्व की भावनात्मक गहराई को दर्शाती है, जहां भाई-बहन का रिश्ता रक्त से नहीं बल्कि भाव से जुड़ा होता है।
आधुनिक समय में रक्षा बंधन का बदलता स्वरूप
आज के समय में रक्षा बंधन का स्वरूप और भी व्यापक हो गया है। अब यह पर्व केवल सगे भाई-बहनों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि चचेरे-ममेरे रिश्तों, मित्रों और सामाजिक संबंधों तक फैल चुका है। कई स्थानों पर बहनें सैनिकों, पुलिसकर्मियों और समाज की रक्षा करने वाले लोगों को भी राखी बांधती हैं, जिससे यह पर्व सामाजिक एकता और सम्मान का प्रतीक बन जाता है। इसके साथ ही ऑनलाइन राखी भेजने की परंपरा ने भी दूर रहने वाले भाई-बहनों के बीच भावनात्मक दूरी को कम किया है।
क्यों विशेष माना जाता है सावन पूर्णिमा का दिन
श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है और इस महीने की पूर्णिमा तिथि को विशेष पुण्यदायी माना जाता है। इसी दिन कई स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य और पवित्र स्नान का भी महत्व होता है। रक्षा बंधन का पर्व इसी शुभ तिथि पर मनाया जाना इस पर्व के आध्यात्मिक महत्व को और भी बढ़ा देता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल लंबे समय तक बना रहता है।
इस प्रकार पंचांग और उदया तिथि के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि वर्ष 2026 में रक्षा बंधन का पर्व शुक्रवार, 28 अगस्त को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसी दिन सुबह के शुभ मुहूर्त में बहनें भाइयों को राखी बांधेंगी और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस पवित्र रिश्ते को और मजबूत करेंगी। यह पर्व न केवल परिवारों को जोड़ता है, बल्कि प्रेम, विश्वास और सुरक्षा की भावना को भी समाज में फैलाता है, जिससे रक्षा बंधन हर वर्ष एक नई ऊर्जा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
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