Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 5 Shloka 5 | गीता अध्याय 2 श्लोक 5 अर्थ सहित | गुरूनहत्वा हि महानुभवान…..

Bhagavad Gita Chapter 2 Verse-Shloka 5 – गीता अध्याय 2 श्लोक 5 अर्थ सहित - गुरूनहत्वा हि महानुभवान..... | Festivalhindu.com

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 2 श्लोक 5 (Bhagwat Geeta adhyay 2 shlok 5 in Hindi): श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक 2.5(Gita Chapter 2 Verse 5) में अर्जुन की मनोस्थिति को दर्शाया गया है। अर्जुन अपने गुरुजनों और बड़ों के प्रति आदर और कर्तव्य के बीच उलझा हुआ है। उसे समझ नहीं आता कि क्या युद्ध करके अपने गुरुजनों का वध करना … Read more

Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 4 Shloka 4 | गीता अध्याय 2 श्लोक 4 अर्थ सहित | कथं भीष्ममहं संख्ये द्रोणं…..

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 2 श्लोक 4 (Bhagwat Geeta adhyay 2 shlok 4 in Hindi): महाभारत के युद्ध में अर्जुन की मानसिक स्थिति को समझना कठिन नहीं है। उनके मन में धर्मसंकट उत्पन्न हो गया, जब उन्हें अपने ही पूजनीय गुरु और पितामह के खिलाफ शस्त्र उठाने की नौबत आ गई। भगवद गीता के श्लोक 2.4(Bhagavad Gita Chapter 2 … Read more

Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 3 Shloka 3 | गीता अध्याय 2 श्लोक 3 अर्थ सहित | क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ…..

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 2 श्लोक 3 (Bhagwat Geeta adhyay 2 shlok 3 in Hindi): गीता के अध्याय 2 के श्लोक 2.3(Gita Chapter 2 Verse 3) में, भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक संदेश देते हैं। इस श्लोक में कृष्ण अर्जुन को मानसिक और हृदयिक दुर्बलता से उबरने का मार्ग दिखाते हैं, जो आज के समय में … Read more

Parvati Mata Ki Aarti: पार्वती माता की आरती- जय पार्वती माता…

Parvati Mata Ki Aarti: पार्वती माता, जिन्हें शिव की अर्धांगिनी के रूप में जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण देवी के रूप में पूजी जाती हैं। वे शक्ति, प्रेम, और परिवार की देवी हैं, और उनका आशीर्वाद परिवारिक जीवन को सुखमय और समृद्ध बनाने में सहायक होता है। पार्वती माता की आरती(Parvati Mata … Read more

Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 2 Shloka 2 | गीता अध्याय 2 श्लोक 2 अर्थ सहित | कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे…..

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 2 श्लोक 2 (Bhagwat Geeta adhyay 2 shlok 2 in Hindi): गीता का दूसरा अध्याय(Gita Chapter 2), श्लोक 2.2(Verse 2.2) में, भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के मन में उत्पन्न हुए शोक और मोह को दूर करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण शिक्षाएं दी हैं। इस श्लोक में भगवान ने अर्जुन से पूछा कि इस कठिन समय … Read more

Siddhivinayak Ji Ki Aarti: श्री सिद्धिविनायक की आरती- जय देव जय देव,जय मंगल मूर्ति…

LAST UPDATED: 14 April 2026 Anil Mohile Siddhivinayak Aarti Lyrics: श्री सिद्धिविनायक, जिन्हें भगवान गणेश के रूप में भी जाना जाता है, हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। गणेश जी को ‘विघ्नहर्ता’ और ‘सिद्धिदाता’ कहा जाता है, जो समस्त विघ्नों को हरने वाले और सिद्धियों का प्रदान करने वाले माने जाते हैं। … Read more

Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 1 Shloka 1 | गीता अध्याय 2 श्लोक 1 अर्थ सहित | तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्…..

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 2 श्लोक 1 (Bhagwat Geeta adhyay 2 shlok 1 in Hindi): भगवद्गीता, महाभारत के युद्ध के मध्य अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण के संवाद के रूप में, जीवन के गूढ़ रहस्यों और मानवता के मार्गदर्शन के सिद्धांतों का अद्वितीय संगम है। द्वितीय अध्याय में, श्रीकृष्ण ने आत्मा और शरीर के भेद को स्पष्ट कर आत्म-साक्षात्कार का … Read more

Raksha Bandhan 2024 (Rakhi) – रक्षाबंधन 2024: तारीख, समय, शुभ मुहूर्त, शुभकामनाएं, पौराणिक कथाएं, इतिहास और महत्व

Raksha Bandhan (रक्षाबंधन) 2024 – Rakhi : तारीख, समय, शुभ मुहूर्त, शुभकामनाएं, पौराणिक कथाएं, इतिहास, तैयारी, विशेष पकवान, उपहार और महत्व – रक्षाबंधन, भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है। यह हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई … Read more

Shani Dev Ki Aarti :शनि देव की आरती- ॐ जय जय शनि महाराज…

शनि देव की आरती (Shani Dev Ki Aarti) हिन्दू धर्म में विशेष स्थान रखती है। इसे विशेष रूप से शनिवार के दिन गाया जाता है, क्योंकि शनिवार को शनि देव का दिन माना जाता है। शनि देव की आरती का उद्देश्य उनके आशीर्वाद और कृपा प्राप्त करना होता है। यह आरती न केवल शनि देव … Read more

Bhagavad Gita Chapter 1 Verse-Shloka 46 – गीता अध्याय 1 श्लोक 46 अर्थ सहित – एवमुक्तवार्जुनः संख्ये रथोपस्थ…..

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 1 श्लोक 46 (Bhagwat Geeta adhyay 1 shlok 46 in Hindi): भगवद्गीता के अध्याय 1 श्लोक 46(Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 46) में संजय ने धृतराष्ट्र को बताया कि अर्जुन ने भगवान कृष्ण से सेनाओं के बीच में अपने रथ को खड़ा करने के लिए कहा। भगवान कृष्ण, जो हृषीकेश (इन्द्रियों के स्वामी) हैं, अर्जुन के … Read more

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