Narsimha Jayanti 2026| नृसिंह जयंती कब है|जाने तारीख, शुभ मुहूर्त और मंत्र

Narsimha Jayanti 2026 Date: भगवान नृसिंह की उपासना को सनातन परंपरा में अत्यंत शक्तिशाली और रक्षक स्वरूप माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब भी भक्त सच्चे मन से भगवान नरसिम्हा की पूजा करते हैं, तो उन्हें जीवन में अनेक प्रकार की बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है। विशेष रूप से यह माना जाता है कि भगवान नृसिंह की कृपा से व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जो लोग लंबे समय से किसी प्रकार के विवाद या मुकदमे में उलझे होते हैं, उन्हें भी सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि इस दिन श्रद्धालु पूरे विश्वास और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।

नृसिंह भगवान को भगवान विष्णु का उग्र और दिव्य अवतार माना जाता है, जो अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। उनकी पूजा से न केवल बाहरी शत्रुओं से सुरक्षा मिलती है, बल्कि व्यक्ति के अंदर के भय और नकारात्मक भाव भी समाप्त होने लगते हैं। बुरी नजर, तंत्र-मंत्र या किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव भी भगवान नरसिम्हा की कृपा से नष्ट हो जाता है। इसी के साथ व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है, जिससे उसका जीवन संतुलित और सफल बनता है।

वैदिक पंचांग के अनुसार हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरसिम्हा जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की विशेष पूजा का विधान बताया गया है। यह पर्व भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दिन की गई पूजा को अत्यधिक फलदायी माना गया है। इसी संदर्भ में यह जानना भी आवश्यक हो जाता है कि वर्ष 2026 में यह पर्व कब मनाया जाएगा और इसके लिए शुभ मुहूर्त तथा पूजा विधि क्या होगी।

कब है नृसिंह जयंती 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 29 अप्रैल को शाम 7 बजकर 51 मिनट पर होगा। इसके बाद यह तिथि अगले दिन यानी 30 अप्रैल को रात 9 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि हिंदू धर्म में किसी भी पर्व को मनाने के लिए उदया तिथि को अधिक महत्व दिया जाता है, इसलिए इस आधार पर नृसिंह जयंती का पर्व 30 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा।

यह दिन गुरुवार का रहेगा, जो स्वयं में भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस प्रकार यह संयोग इस पर्व के महत्व को और भी बढ़ा देता है। श्रद्धालु इस दिन पूरे विधि-विधान से भगवान नृसिंह की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नृसिंह जयंती की पूजा सायंकाल के समय करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। यह समय भगवान नृसिंह के प्रकट होने का भी माना जाता है, इसलिए इस अवधि में पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।

वर्ष 2026 में 30 अप्रैल को पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 4 बजकर 17 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। यह समय अवधि भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इसी दौरान पूजा करने से भगवान नृसिंह की विशेष कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धालु इस मुहूर्त में विधिपूर्वक पूजा कर सकते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।

नृसिंह जयंती की पूजा विधि

नृसिंह जयंती के दिन पूजा करने से पहले घर या पूजा स्थल की अच्छी तरह से सफाई करना आवश्यक माना गया है। स्वच्छ वातावरण में की गई पूजा अधिक प्रभावशाली होती है और इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके बाद एक साफ चौकी पर भगवान नृसिंह की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है।

प्रतिमा स्थापित करने के बाद भगवान के समक्ष दीपक जलाया जाता है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर करने और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक होता है। इसके पश्चात श्रद्धालु भगवान नृसिंह के मंत्रों का जाप करते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ उनका ध्यान करते हैं। पूजा के दौरान भगवान को भोग अर्पित किया जाता है, जिसमें नैवेद्य के रूप में शर्करा और अन्य भक्ष्य-भोज्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं।

पूजा का समापन करते समय भक्त भगवान से अपने पापों के नाश और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं। यह पूरी प्रक्रिया श्रद्धा, भक्ति और विश्वास के साथ की जाती है, जिससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

करें इन मंत्रों का जाप

नैवेद्यं शर्करां चापि भक्ष्यभोज्यसमन्वितम्। ददामि ते रमाकांत सर्वपापक्षयं कुरु।।

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥

ॐ उग्रनृसिंहाय विद्महे, वज्रनखाय धीमहि। तन्नो नृसिंहः प्रचोदयात्।

नारायणानन्त हरे नृसिंह प्रह्लादबाधा हरेः कृपालु:

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