Hanuman Jayanti 2026| हनुमान जयंती की रात पढ़े बजरंग बाण| जाने सही विधि, ना करे ये गलती

चैत्र मास की पूर्णिमा का दिन भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसे हनुमान जयंती कहा जाता है। यह दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि संकटमोचन हनुमान जी की पूजा और आराधना से जीवन की कठिनाइयों को दूर करने की मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार हनुमान जयंती की रात अत्यंत सिद्ध और प्रभावशाली मानी जाती है, जब की गई पूजा और पाठ का विशेष फल प्राप्त होता है। (Hanuman Jayanti)

Hanuman Jayanti 2026

मान्यता है कि इस पवित्र रात्रि में श्रद्धा और भक्ति के साथ बजरंग बाण का पाठ करने से बड़े से बड़े संकट भी दूर हो सकते हैं। बजरंग बाण को भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने का प्रभावशाली माध्यम माना जाता है। भक्त इस दिन विशेष रूप से बजरंग बाण का पाठ कर अपने जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हैं। यह पाठ मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना गया है।

हनुमान जयंती की रात का समय साधना और भक्ति के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है, इसलिए इस समय किया गया पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

बजरंग बाण पाठ की सही विधि

हनुमान जयंती की रात बजरंग बाण का पाठ करने से पहले शांत और स्वच्छ स्थान का चयन करना आवश्यक माना जाता है। इस दौरान पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है। यह दिशा आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए अनुकूल मानी जाती है, जिससे पाठ करते समय मन अधिक एकाग्र रहता है।

पाठ के दौरान लाल रंग के आसन पर बैठना शुभ माना गया है। यदि संभव हो तो लाल वस्त्र धारण करना भी उत्तम माना जाता है, क्योंकि लाल रंग भगवान हनुमान को प्रिय माना जाता है। इसके बाद चमेली के तेल का दीपक जलाना चाहिए और दीपक में दो लौंग डालनी चाहिए। यह प्रक्रिया पूजा के वातावरण को पवित्र और सकारात्मक बनाती है।

पूजा के दौरान हनुमान जी को बेसन के लड्डू या बूंदी का भोग लगाया जाता है। इसके बाद पाठ शुरू करने से पहले हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना व्यक्त करनी चाहिए और भगवान श्रीराम का ध्यान करना चाहिए। इसके पश्चात श्रद्धा और ध्यान के साथ बजरंग बाण का पाठ प्रारंभ किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार कम से कम एक, तीन, पांच या सात बार बजरंग बाण का पाठ कर सकते हैं। पाठ समाप्त होने के बाद भगवान हनुमान की आरती करना शुभ माना जाता है।

इन नियमों का रखें ध्यान

हनुमान जयंती के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है, जिससे साधना का प्रभाव बढ़ता है और मन अधिक शांत रहता है। भक्तों को इस दिन सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए और अपने विचारों को सकारात्मक बनाए रखना चाहिए।

इस दिन मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए तथा मन में किसी के प्रति नकारात्मक भावना नहीं रखनी चाहिए। पूजा के दौरान शुद्धता और श्रद्धा बनाए रखना आवश्यक माना जाता है। साथ ही बजरंग बाण के शब्दों का उच्चारण स्पष्ट और सही करना भी महत्वपूर्ण माना गया है, ताकि पाठ का पूर्ण लाभ प्राप्त हो सके।

हनुमान जयंती की रात श्रद्धा, भक्ति और नियमों के साथ किया गया बजरंग बाण पाठ भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला माना जाता है। यह साधना व्यक्ति को मानसिक शक्ति, साहस और आत्मविश्वास प्रदान करती है तथा जीवन में आने वाले संकटों को दूर करने में सहायक मानी जाती है।

॥श्री बजरंग बाण पाठ॥

॥ दोहा ॥

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमंत संत हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ॥
जन के काज बिलंब न कीजै । आतुर दौरि महा सुख दीजै ॥
जैसे कूदि सिंधु महिपारा । सुरसा बदन पैठि बिस्तारा ॥
आगे जाय लंकिनी रोका । मारेहु लात गई सुरलोका ॥
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा । सीता निरखि परमपद लीन्हा ॥
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा । अति आतुर जमकातर तोरा ॥
अक्षय कुमार मारि संहारा । लूम लपेटि लंक को जारा ॥
लाह समान लंक जरि गई । जय जय धुनि सुरपुर नभ भई ॥
अब बिलंब केहि कारन स्वामी । कृपा करहु उर अन्तर्यामी ॥
जय जय लखन प्राण के दाता । आतुर ह्वै दुःख करहु निपाता ॥
जै गिरिधर जै जै सुख सागर । सुर-समूह-समरथ भटनागर ॥
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले । बैरिहि मारु बज्र की कीले ॥
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो॥
ॐ कार हुंकार महाप्रभु धावो । बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ।
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीशा । ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा ॥

सत्य होहु हरि शपथ पायके । राम दूत धरु मारु जाय के ॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा । दुःख पावत जन केहि अपराधा ॥
पूजा जप तप नेम अचारा । नहिं जानत हौं दास तुम्हारा ॥
वन उपवन मग गिरि गृह माहीं । तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ॥
पांय परौं कर जोरि मनावौं । येहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥
जय अंजनि कुमार बलवंता । शंकर सुवन वीर हनुमंता ॥
बदन कराल काल कुल घालक । राम सहाय सदा प्रतिपालक ॥
भूत, प्रेत, पिशाच निशाचर । अग्नि बेताल काल मारी मर ॥
इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की । राखउ नाथ मरजाद नाम की ॥
जनकसुता हरि दास कहावो । ताकी शपथ बिलंब न लावो ॥
जै जै जै धुनि होत अकासा । सुमिरत होय दुसह दुःख नाशा ॥
चरण शरण कर जोरि मनावौं । यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥
उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई । पाँय परौं, कर जोरि मनाई ॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता । ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ॥
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल । ॐ सं सं सहमि पराने खल दल ॥
अपने जन को तुरत उबारो । सुमिरत होय आनंद हमरो ॥
यह बजरंग बाण जेहि मारै । ताहि कहो फिरि कौन उबारै ॥
पाठ करै बजरंग बाण की । हनुमत रक्षा करै प्रान की ॥
यह बजरंग बाण जो जापै । ताते भूत-प्रेत सब कापैं ॥
धूप देय जो जपै हमेशा । ताके तन नहिं रहै कलेशा ॥

॥ दोहा ॥

प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान ॥

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