नवरात्रि के नौ दिनों में हर दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. इन नौ स्वरूपों में से सातवां स्वरूप माता कालरात्रि का है. माता कालरात्रि अंधकार और अज्ञान को दूर करने वाली शक्तिशाली देवी हैं. इनकी पूजा करने से भक्तों को भय, और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है. साथ ही माता कालरात्रि अपने भक्तों को शक्ति, साहस और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं. इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि को कैसे प्रसन्न किया जाए, उन्हें कौन से भोग प्रिय हैं और उनकी पूजा विधि क्या है.

माता कालरात्रि का स्वरूप और महत्व (Mata Kaalratri ka Mahatva)
माता कालरात्रि को घोर रूप वाली देवी माना जाता है. इनका रंग काला होता है और इनके चार हाथ होते हैं. इनके एक हाथ में त्रिशूल होता है, दूसरे हाथ में खड्ग होता है, तीसरे हाथ में पाश होता है और चौथे हाथ में वरद मुद्रा होता है. माता कालरात्रि के गले में मुंडों की माला होती है और इनके वाहन खर का होता है. भले ही माता कालरात्रि का स्वरूप भयानक लगता है, लेकिन इनकी पूजा करने से भक्तों को किसी भी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है. साथ ही माता कालरात्रि अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें जीवन में सफलता प्राप्त करने में सहायता करती हैं.
माता कालरात्रि को प्रिय भोग (Mata Kaalratri ka Bhog)
माता कालरात्रि को प्रसन्न करने के लिए उन्हें विभिन्न प्रकार के भोग लगाए जा सकते हैं. इनमें से कुछ प्रिय भोगों के बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है:
- गुड़: माता कालरात्रि को गुड़ का भोग सबसे ज्यादा प्रिय होता है. आप उन्हें गुड़ की खीर, गुड़ का हलवा या गुड़ के लड्डू बनाकर भोग लगा सकते हैं. गुड़ को सत्विक और शुद्ध माना जाता है. यह न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि सेहत के लिए भी लाभदायक होता है.
- नारियल: माता कालरात्रि को नारियल का फल और जल भी बहुत पसंद है. आप उन्हें नारियल का पानी, नारियल का बुरादा या नारियल की बर्फी का भोग लगा सकते हैं. नारियल को भी सत्विक माना जाता है और यह शरीर को शीतलता प्रदान करता है.
- जामुन: माता कालरात्रि को जामुन का फल भी प्रिय होता है. आप उन्हें जामुन का रस या जामुन की मिठाई का भोग लगा सकते हैं. जामुन में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो शरीर को रोगों से बचाने में मदद करते हैं.
- केला: केला भी माता कालरात्रि को प्रिय फल है. आप उन्हें केले का प्रसाद या केले की खीर का भोग लगा सकते हैं. केला पोटेशियम का अच्छा स्रोत होता है जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है.
- फल: माता कालरात्रि को मौसमी फलों का भोग भी लगाया जा सकता है. आप उन्हें सेब, संतरा, अंगूर, मौसमी आदि फलों का मिश्रण भोग में चढ़ा सकते हैं. फलों में विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने में सहायता करते हैं.
- सब्जियां: कुछ खास सब्जियां भी माता कालरात्रि को प्रिय होती हैं. आप उन्हें कद्दू, करेला, और भिंडी जैसी सब्जियों का भोग लगा सकते हैं. ये सब्जियां पौष्टिक होती हैं और शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती हैं.
- मिठाई : आप उन्हें खीर, हलवा, लड्डू, या बर्फी जैसी सात्विक मिठाई का भोग लगा सकते हैं. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि मिठाई बनाते समय शहद का उपयोग नहीं करना चाहिए. गुड़ या चीनी का उपयोग मिठाई बनाने में किया जा सकता है.
भोग बनाते समय ध्यान देने योग्य बातें:
- भोजन हमेशा सात्विक और ताजा होना चाहिए.
- भोजन बनाते समय लहसुन, प्याज और मांसाहारी चीजों का उपयोग नहीं करना चाहिए.
- भोजन को हमेशा स्वच्छ और पवित्र स्थान पर रखना चाहिए.
- भोजन बनाते और लगाते समय भक्तों को पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव रखना चाहिए.
माता कालरात्रि की पूजा विधि (Mata Kaalratri Ki Puja Vidhi)
माता कालरात्रि की कृपा पाने के लिए उनकी विधि-विधान से पूजा करना जरूरी है. पूजा विधि निम्नलिखित है:
- सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें.
- एक चौकी या वेदी स्थापित करें और उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं.
- इसके बाद माता कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें.
- प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं और फिर उन्हें वस्त्र और आभूषण अर्पित करें.
- इसके बाद माता कालरात्रि को सिंदूर, रोली, अक्षत, पुष्प और धूप-दीप अर्पित करें.
- माता कालरात्रि को प्रसाद के रूप में उनके प्रिय भोग चढ़ाएं.
- माता कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें और उनकी आरती गाएं. कुछ प्रमुख मंत्र इस प्रकार हैं:
या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपणि स्थित।। नामस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै नाशाय स्वाहा॥
- पूजा के अंत में माता कालरात्रि से अपनी मनोकामनाएं प्रार्थना करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें.
नवरात्रि के सातवें दिन किए जाने वाले अन्य कार्य
नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा के अलावा आप कुछ अन्य कार्य भी कर सकते हैं. ये कार्य इस प्रकार हैं:
- कन्या पूजन: आप नौ कन्याओं को अपने घर बुलाकर उनका पूजन कर सकते हैं. कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा दें. ऐसा करने से माता कालरात्रि का आशीर्वाद प्राप्त होता है और कन्याओं को भी सम्मान मिलता है.
- हवन: आप यज्ञशाला में हवन करवा सकते हैं. हवन करने से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है.
- दान: दान करना नवरात्रि के हर दिन शुभ माना जाता है. आप गरीबों और जरूरतमंदों को दान देकर पुण्य कमा सकते हैं.
उपसंहार
नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा करने और उन्हें प्रसन्न करने से भक्तों को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं. माता कालरात्रि भक्तों को डर, भय और नकारात्मक विचारों से मुक्ति दिलाती हैं. साथ ही वे अपने भक्तों को शक्ति, साहस और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं. इस लेख में बताए गए तरीकों से आप माता कालरात्रि की पूजा कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं. जय माता काली!