ज्योतिष शास्त्र में कुंडली में बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश की आराधना करने की सलाह दी जाती है। जब कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है, तो व्यक्ति को व्यापार और अन्य कार्यों में मनचाही सफलता प्राप्त होती है। साथ ही, शुभ कार्यों में भी सफलता मिलती है।

हर माह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। सनातन धर्म में यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत का पालन करते हैं। यह व्रत सुख, समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि करता है, साथ ही करियर और व्यवसाय में भी सफलता दिलाता है।
श्रद्धालु पूरी आस्था और भक्ति के साथ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए व्रत रखते हैं। मान्यता है कि भगवान गणेश की कृपा से ग्रहों के राजकुमार माने जाने वाले बुध देव प्रसन्न होते हैं और जातक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए, इस वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में जानते हैं।
विनायक चतुर्थी का शुभ मुहूर्त (Vinayak Chaturthi 2025 Date and Time)
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि इस वर्ष 1 अप्रैल को प्रातः 5 बजकर 42 मिनट पर प्रारंभ होगी। यह तिथि 2 अप्रैल को रात 2 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी।
इस दिन चंद्रास्त रात्रि 10 बजकर 14 मिनट पर होगा। श्रद्धालु गण 1 अप्रैल को विधि-विधान से विनायक चतुर्थी का व्रत रख सकते हैं और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
विनायक चतुर्थी 2025 के शुभ योग और पंचांग (Vinayak Chaturthi 2025 Shubh Yog)
पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर इस वर्ष प्रीति योग का विशेष संयोग बन रहा है। यह शुभ योग सुबह 9 बजकर 48 मिनट से प्रारंभ होकर रात्रि तक बना रहेगा। इसके साथ ही भद्रावास का भी निर्माण हो रहा है। इसके अतिरिक्त, भरणी और कृत्तिका नक्षत्र का संयोग भी इस दिन को और पावन बना रहा है। मान्यता है कि इन शुभ योगों में भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के समस्त कष्ट और परेशानियां दूर हो जाती हैं।
पंचांग विवरण:
- सूर्योदय: प्रातः 6:11 बजे
- सूर्यास्त: सायं 6:39 बजे
- चंद्रोदय: प्रातः 7:54 बजे
- चंद्रास्त: रात्रि 10:14 बजे
शुभ मुहूर्त:
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:39 बजे से 5:25 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:10 बजे से 3:20 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: सायं 6:38 बजे से 7:01 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात्रि 12:01 बजे से 12:48 बजे तक
इन शुभ मुहूर्तों में भगवान गणेश की आराधना करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है और समस्त विघ्न बाधाएं दूर हो जाती हैं।
विनायक चतुर्थी महत्व (Vinayak Chaturthi Mahtava)
विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से जीवन के समस्त कष्ट और बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। इस पावन अवसर पर श्रद्धा भाव से गणपति बप्पा की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक संपन्नता का वास होता है। साथ ही व्यक्ति को ज्ञान, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति भी होती है।
मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से इस दिन व्रत और पूजा करते हैं, उनके सभी कार्य सफल होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। भगवान गणेश अपने भक्तों के जीवन में आने वाली सभी परेशानियों को दूर कर उनका मार्ग प्रशस्त करते हैं। यदि इस व्रत को संपूर्ण श्रद्धा और सही विधि-विधान के साथ किया जाए, तो साधक को मनोवांछित फल अवश्य प्राप्त होता है।
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