January 2026 me sakat chauth kab hai: सकट चौथ का व्रत हिंदू धर्म में विशेष रूप से माताओं द्वारा संतान की रक्षा, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है। यह व्रत केवल पारिवारिक मंगलकामना तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसे अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। (Sakat Chauth date jan 2026)मान्यता है कि सकट चौथ का विधिपूर्वक पालन करने से बुध ग्रह से जुड़े अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और जीवन में बुद्धि, विवेक तथा सकारात्मकता का संचार होता है।
यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें संकट हरने वाले और प्रथम पूज्य देव के रूप में पूजा जाता है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला यह व्रत श्रद्धा, धैर्य और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
माताओं का व्रत और चंद्र दर्शन की परंपरा
सकट चौथ पर महिलाएं प्रातःकाल से व्रत आरंभ करती हैं और पूरे दिन उपवास रखती हैं। इस व्रत में संयम और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। संध्या समय चंद्रमा के उदय के बाद चंद्र दर्शन और भगवान गणेश की पूजा कर व्रत खोला जाता है। ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा के दर्शन के बिना यह व्रत पूर्ण नहीं होता। चंद्रमा को अर्घ्य देने और गणपति की आराधना से संतान के जीवन में आने वाले कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। यही कारण है कि इस व्रत को संतान सुख का प्रमुख व्रत कहा गया है।
सकट चौथ 2026 की तिथि को लेकर भ्रम
हर वर्ष की तरह वर्ष 2026 में भी सकट चौथ की तिथि को लेकर श्रद्धालुओं के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इसका मुख्य कारण चतुर्थी तिथि का दो दिनों तक रहना है। पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 06 जनवरी 2026 को सुबह 08:01 बजे प्रारंभ हो रही है और 07 जनवरी 2026 को सुबह 06:52 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर दोनों दिनों में से किसी एक को चुनना कठिन लग सकता है, लेकिन सकट चौथ में तिथि से अधिक महत्व चंद्र उदय का माना गया है।
चंद्रोदय के अनुसार सकट चौथ 2026
सकट चौथ के व्रत में चंद्रमा की पूजा का विशेष विधान होने के कारण चंद्रोदय को आधार मानकर व्रत का निर्णय किया जाता है। वर्ष 2026 में 06 जनवरी को चंद्रमा का उदय चतुर्थी तिथि के भीतर हो रहा है। इसी कारण 06 जनवरी 2026, मंगलवार को सकट चौथ का व्रत रखा जाएगा। इस दिन माताएं पूरे विधि-विधान से गणेश जी की पूजा कर संतान की कुशलता और उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करेंगी।
सकट चौथ पूजा मुहूर्त 2026
सकट चौथ के दिन पूजा का सही समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शुभ योग और मुहूर्त में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में सकट चौथ के दिन प्रातः 09:51 बजे से दोपहर 01:45 बजे तक पूजा का शुभ समय रहेगा। इसी दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 07:15 बजे से 12:17 बजे तक बन रहा है, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। प्रीति योग प्रातःकाल से रात्रि 08:21 बजे तक रहेगा, जो पूजा-पाठ के लिए अनुकूल है।
नक्षत्र और विशेष काल का महत्व
इस दिन अश्लेषा नक्षत्र प्रातःकाल से दोपहर 12:17 बजे तक प्रभावी रहेगा। नक्षत्र का प्रभाव पूजा की ऊर्जा को और अधिक सशक्त बनाता है। ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 05:26 बजे से 06:21 बजे तक रहेगा, जिसे साधना और मानसिक शुद्धि के लिए श्रेष्ठ समय माना जाता है। इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से 12:48 बजे तक रहेगा, जिसमें की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। वहीं राहुकाल दोपहर 03:03 बजे से 04:21 बजे तक रहेगा, इस समय किसी भी प्रकार का शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
सकट चौथ 2026 में भद्रा का साया
सकट चौथ के दिन भद्रा का भी प्रभाव देखने को मिलेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। वर्ष 2026 में भद्रा का समय सुबह 07:15 बजे से 08:01 बजे तक रहेगा। यह अवधि कुल 46 मिनट की होगी। भद्रा का वास धरती पर माना गया है, इसलिए इस दौरान पूजा या कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। श्रद्धालुओं को चाहिए कि भद्रा समाप्त होने के बाद ही सकट चौथ की पूजा करें, ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
सकट चौथ पूजा का आध्यात्मिक फल
सकट चौथ का व्रत केवल एक परंपरा नहीं बल्कि गहरी आध्यात्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। इस दिन भगवान गणेश की आराधना से जीवन के संकट दूर होते हैं और संतान के भाग्य में सकारात्मक परिवर्तन आता है। माना जाता है कि जो माता श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत करती है, उसकी संतान को शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से बल प्राप्त होता है। साथ ही परिवार में समृद्धि और सौहार्द बना रहता है।
वर्ष 2026 में सकट चौथ 06 जनवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी। सही तिथि, शुभ मुहूर्त और भद्रा काल की जानकारी के साथ यदि यह व्रत किया जाए, तो इसका पुण्य और प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। भगवान गणेश की कृपा से संतान का जीवन सुखमय हो और परिवार में हमेशा मंगल बना रहे, यही सकट चौथ व्रत की सच्ची भावना है।
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