Ekadashi May 2024 : मोहिनी एकादशी कब है, तिथि, महत्व, और घर मे सुख-समृद्धि के लिए करे ये खास उपाय

मोहिनी एकादशी हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। यह भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी है, जिसका पालन करने से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति और आध्यात्मिक विकास में सहायता मिलती है. आइए इस लेख में गहराई से जानते हैं मोहिनी एकादशी 2024 के तिथि, महत्व, पूजा विधि, और सुख-समृद्धि के उपायों के बारे में।

May Ekadashi 2024

मोहिनी एकादशी 2024: तिथि और मुहूर्त (Mohini Ekadashi 2024 Date)

मोहिनी एकादशी हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ती है। वर्ष 2024 में मोहिनी एकादशी का पर्व 19 मई 2024 को मनाया जाएगा।

इस वर्ष मोहिनी एकादशी से जुड़े महत्वपूर्ण मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 19 मई 2024, सुबह 5:28 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 20 मई 2024, सुबह 8:21 बजे

मोहिनी एकादशी का धार्मिक महत्व (Mohini Ekadashi Importance)

मोहिनी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। आइए जानते हैं इस पर्व के कुछ प्रमुख धार्मिक महत्वों के बारे में:

  • पापों से मुक्ति: ऐसी मान्यता है कि मोहिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के पूर्व जन्मों के कर्मों का भी नाश होता है।
  • मोह-माया से मुक्ति: मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की उपासना करने से व्यक्ति को मोह-माया के चक्रव्यूह से बाहर निकलने में सहायता मिलती है। यह व्रत आध्यात्मिक जागरण का मार्ग प्रशस्त करता है।
  • सुख-समृद्धि की प्राप्ति: मोहिनी एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की सच्ची श्रद्धा से पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। माता लक्ष्मी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं, इसलिए इस दिन उनकी भी पूजा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
  • मनोकामना पूर्ति: मोहिनी एकादशी पर विधिपूर्वक व्रत रखने और भगवान विष्णु की आराधना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस दिन सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान विष्णु तक अवश्य पहुंचती है।

मोहिनी एकादशी की व्रत विधि (Mohini Ekadashi Vrat Vidhi)

मोहिनी एकादशी का व्रत विधिपूर्वक रखने से भक्तों को अधिकतम लाभ प्राप्त होता है। आइए जानते हैं मोहिनी एकादशी की व्रत विधि के बारे में:

  • दशमी तिथि की तैयारी: दशमी तिथि यानी मोहिनी एकादशी से एक दिन पहले सात्विक भोजन करें। इस दिन सात्विक भोजन करने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं। सूर्यास्त के बाद किसी भी प्रकार का भोजन न करें।
  • एकादशी तिथि के प्रारंभिक कार्य: मोहिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान कर लें। स्नान करने के बाद स्वच्छ और धुले हुए वस्त्र धारण करें। इसके पश्चात् पूजा स्थल को साफ करें और सजाएं।
  • पूजा सामग्री: पूजा के लिए तुलसी पत्र, फल, फूल, धूप, दीप, मिठाई और पंचामृत जैसी सामग्री का प्रयोग करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जप करते हुए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विधिवत पूजन करें। पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं।
  • व्रत का संकल्प: पूजा के पश्चात् मोहिनी एकादशी का व्रत रखने का संकल्प लें। संकल्प लेते समय मन में शुद्ध भाव रखें और व्रत को पूर्ण करने का दृढ़ निश्चय करें।
  • व्रत का पालन: मोहिनी एकादशी के दिन पूरे दिन उपवास रखें। इस दिन जल भी ग्रहण नहीं करना चाहिए। आप चाहें तो फलों का रस ग्रहण कर सकते हैं। दिनभर भगवान विष्णु का ध्यान करें और उनके नाम का जप करें। भगवान विष्णु से जुड़े ग्रंथों का पाठ भी इस दिन किया जा सकता है।
  • द्वादशी तिथि के कार्य: द्वादशी तिथि यानी मोहिनी एकादशी के अगले दिन सूर्योदय के बाद स्नान करें और पुनः भगवान विष्णु का पूजन करें। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-पुण्य करें। इसके पश्चात् पारण विधि संपन्न कर व्रत का समापन करें। पारण विधि में सबसे पहले थोड़ा सा अन्न ग्रहण करें और फिर भोजन ग्रहण करें।

मोहिनी एकादशी पर सुख-समृद्धि के लिए उपाय (Mohini Ekadashi Upaay)

मोहिनी एकादशी के दिन कुछ विशेष उपाय करने से भक्तों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में:

  • तुलसी पूजा का महत्व: मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। तुलसी को भगवान विष्णु को अति प्रिय माना जाता है, इसलिए इस दिन तुलसी की पूजा करने और भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
  • गाय को चारा खिलाएं: मोहिनी एकादशी के दिन गाय को हरा चारा खिलाने का भी विशेष महत्व है। गाय को हिंदू धर्म में पूजनीय माना जाता है। गाय की सेवा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और साथ ही मोहिनी एकादशी के व्रत का फल भी शुभ प्राप्त होता है।
  • दान-पुण्य का महत्व: मोहिनी एकादशी के दिन दान-पुण्य करने से भी भक्तों को शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करें और अन्न, वस्त्र आदि का दान करें। दान-पुण्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
  • सत्य बोलें और सदाचरण का पालन करें: मोहिनी एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को सत्य बोलना चाहिए और दूसरों के साथ सद्व्यवहार करना चाहिए। किसी भी प्रकार का क्रोध, झूठ, और हिंसा इस व्रत के दौरान नहीं करना चाहिए। सदाचरण का पालन करने से व्रत का फल शुभ प्राप्त होता है।
  • शांति और एकाग्रता बनाए रखें: मोहिनी एकादशी के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखना चाहिए। इस दिन किसी भी प्रकार का मनोरंजन नहीं करना चाहिए। भगवान विष्णु का ध्यान करें और उनके नाम का जप करें। शांति और एकाग्रता बनाए रखने से व्रत का फल शीघ्र प्राप्त होता है।

मोहिनी एकादशी की कथा (Mohini Ekadashi Katha)

मोहिनी एकादशी से जुड़ी एक पौराणिक कथा प्रचलित है। इस कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत निकला। अमृत को पाने के लिए देवताओं और दानवों के बीच संघर्ष छिड़ गया। दानव बलशाली थे और अमृत को हथियाना चाहते थे। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया। मोहिनी रूप अत्यंत मनमोहक था। दानव मोहिनी के रूप पर मोहित हो गए। मोहिनी ने चतुराई से देवताओं को अमृत पिला दिया और दानवों को अमृत ग्रहण करने से रोक दिया। इस प्रकार, मोहिनी रूप धारण कर भगवान विष्णु ने देवताओं को अमरत्व प्रदान किया।

कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था। इसलिए इस दिन को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। मोहिनी एकादशी की कथा हमें यह सीख देती है कि चतुराई और बुद्धि से कठिन परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है। साथ ही, भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए सच्ची भक्ति और कर्म की आवश्यकता होती है।

मोहिनी एकादशी से जुड़ी मान्यताएं

मोहिनी एकादशी से जुड़ी कुछ अन्य मान्यताएं भी प्रचलित हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है:

  • मोहिनी एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को अगले जन्म में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के शंख का दर्शन करने से अशुभ दूर होते हैं।
  • इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करने से भी शुभ फल प्राप्त होते हैं।

मोहिनी एकादशी का पर्व आध्यात्मिक विकास और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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