माघ पूर्णिमा का पावन पर्व इस वर्ष 12 फरवरी, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन स्नान के बाद पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण किया जाता है, जिससे वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यदि किसी व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति पानी हो या नाराज पितरों को प्रसन्न करना हो, तो माघ पूर्णिमा पर विशेष उपाय किए जा सकते हैं। इस दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए तीन महत्वपूर्ण कार्य अवश्य करने चाहिए, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे।

माघ पूर्णिमा का पावन पर्व इस वर्ष 12 फरवरी, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद दान करने का विशेष महत्व होता है, जिससे अपार पुण्य की प्राप्ति होती है। माघ पूर्णिमा पर प्रयागराज के संगम में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की कृपा सहज ही प्राप्त होती है।
इस दिन स्नान के उपरांत पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया जाता है, जिससे वे तृप्त होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यदि कोई व्यक्ति पितृ दोष से मुक्ति पाना चाहता हो या नाराज पितरों को प्रसन्न करना चाहता हो, तो इस दिन विशेष उपाय किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं कि माघ पूर्णिमा पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए तीन प्रमुख कार्य कौन-से करने चाहिए।
माघ पूर्णिमा 2025: तिथि एवं शुभ मुहूर्त (Magh Purnima 2025 Date and Time)
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 11 फरवरी 2025, शाम 6:55 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 12 फरवरी 2025, शाम 7:22 बजे
- स्नान-दान का शुभ मुहूर्त: 12 फरवरी को प्रातः 5:19 बजे से 6:10 बजे तक
हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 11 फरवरी को शाम 6:55 बजे आरंभ होगी। चूंकि सूर्योदय 12 फरवरी को पूर्णिमा तिथि में होगा, इसलिए माघ पूर्णिमा का पर्व 12 फरवरी 2025, बुधवार को मनाया जाएगा।
नदी में स्नान के बाद तर्पण (Magh Purnima 2025 Upay)
यदि आप माघ पूर्णिमा पर किसी पवित्र नदी में स्नान कर रहे हैं, तो स्नान के अंत में कमर तक जल में खड़े होकर अपनी अंजलि में पवित्र जल लें। इसके बाद अपने पितरों का स्मरण करें और अंगूठे एवं तर्जनी अंगुली के बीच से जल अर्पित करें। इस विधि द्वारा पितरों को जल अर्पण करने से वे तृप्त होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
जो व्यक्ति घर पर माघ पूर्णिमा का स्नान कर रहे हैं, वे स्नान के उपरांत कुशा, जल और काले तिल के माध्यम से पितरों को तर्पण कर सकते हैं। कुशा के आगे के भाग से काले तिल युक्त जल पितरों को अर्पित करें। ऐसी विधि से किए गए तर्पण से पितरों तक जल पहुंचता है, जिससे वे संतुष्ट होकर कृपा प्रदान करते हैं।
अन्न और वस्त्र का दान का
माघ पूर्णिमा पर स्नान और तर्पण के बाद पितरों को प्रसन्न करने के लिए अन्न एवं वस्त्र का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से सफेद रंग के वस्त्र दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है। यह उपाय पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
पितरों के लिए दीप जलाएं
माघ पूर्णिमा की संध्या काल में पितरों की कृपा प्राप्त करने हेतु सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। सूर्यास्त के बाद, जब अंधेरा छाने लगे, तो घर के बाहर दक्षिण दिशा में एक दीप प्रज्वलित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन पितर पृथ्वी से अपने लोक लौटते हैं। ऐसे में दीप जलाने से उनके मार्ग में प्रकाश बना रहता है, जिससे वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
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