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July Masik Shivratri 2024 : जुलाई 2024 में मासिक शिवरात्रि व्रत कब है, तिथि शुभ मुहूर्त और पूजा के लाभ

हिंदू धर्म में भगवान शिव को शिव, महादेव, शंकर आदि अनेक नामों से जाना जाता है. इनके भक्तों के लिए हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि विशेष महत्व रखती है. इस दिन मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. यह दिन आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति की कामना रखने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है. आइए, इस लेख में हम जुलाई 2024 में आने वाली मासिक शिवरात्रि की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और लाभों के बारे में विस्तार से जानें.

मासिक शिवरात्रि का महत्व (Masik Shivratri 2024 Significance)

मासिक शिवरात्रि का पर्व न केवल भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम है, बल्कि यह आत्मिक शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है. इस दिन किए जाने वाले व्रत और पूजा से व्यक्ति को कई लाभ प्राप्त होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

  • पापों का नाश: माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि के व्रत और पूजा से व्यक्ति के पूर्व जन्मों के पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है.
  • मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि: इस व्रत के पालन से व्यक्ति के मन में सकारात्मक विचारों का विकास होता है. शरीर शुद्ध होता है और आत्मा को शांति मिलती है.
  • ग्रह दोषों का निवारण: हिंदू ज्योतिष के अनुसार, मासिक शिवरात्रि के व्रत से ग्रहों के दोष कम होते हैं और कुंडली में शुभ फल प्राप्त होते हैं.
  • मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से किया गया मासिक शिवरात्रि का व्रत भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करने में सहायक होता है.

जुलाई 2024 में मासिक शिवरात्रि: तिथि और शुभ मुहूर्त (July Masik Shivratri 2024 Date)

जुलाई 2024 में मासिक शिवरात्रि का पर्व 04 जुलाई, को मनाया जाएगा. इस दिन भगवान शिव की पूजा करने के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:

  • निर्वाण मुहूर्त: रात 11:57 बजे से 12:52 बजे तक
  • मध्यरात्रि मुहूर्त: रात 12:52 बजे से 1:47 बजे तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:05 बजे से 4:50 बजे तक

आप अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं.

मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि (Masik Shivratri 2024 Puja Vidhi)

मासिक शिवरात्रि के व्रत और पूजा को विधि-विधान से करने से ही आपको अधिकतम लाभ प्राप्त होते हैं. नीचे दिए गए चरणों का पालन करके आप इस पर्व को मना सकते हैं:

  1. पूर्व तैयारियां: इस व्रत की तैयारी एक दिन पहले ही कर लेनी चाहिए. रात्रि में हल्का भोजन करें और सूर्योदय से पहले उठने का संकल्प लें.
  2. स्नान और वस्त्र धारण: व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें. स्वच्छ और धुले हुए वस्त्र पहनें.
  3. पूजा स्थान की साफ-सफाई: अपने घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें और सजाएं. आप दीप जलाकर और अगरबत्ती लगाकर वातावरण को शुद्ध कर सकते हैं.
  4. मूर्ति या शिवलिंग स्थापना: पूजा स्थान पर एक चौकी या आसन बिछाएं. इस पर भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें.
  5. पंचामृत स्नान और पूजन सामग्री: भगवान शिव को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण) से स्नान कराएं. इसके बाद उन्हें जल, बेलपत्र, धतूरा (शास्त्रीय विधि से ग्रहण करें), आंकड़े के फूल, भांग (यदि धार्मिक मान्यता अनुसार ग्रहण कर सकते हैं), चंदन का लेप, धूप, दीप और फल आदि अर्पित करें.
  6. मंत्र जाप: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें. आप “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनाम् उर्वारुकमिव बंधनान् मृत्योर मुक्षीय माऽमृतात्” (महामृत्युंजय मंत्र) का भी जाप कर सकते हैं.
  7. जागरण और भजन: यदि संभव हो तो रात भर जागरण करें और भगवान शिव के भजन-कीर्तन करें. इससे आपका मन शांत होगा और भक्ति भाव जागृत होगा.
  8. व्रत का पारण: अगले दिन सूर्योदय के बाद आप फलाहार ग्रहण करके व्रत का पारण कर सकते हैं. आप अपने परिवार और ब्राह्मणों को भी भोजन करा सकते हैं.

मासिक शिवरात्रि व्रत कथा (Masik Shivratri 2024 Vrat Katha)

मासिक शिवरात्रि के महत्व को समझने के लिए एक प्रचलित कथा प्रचलित है:

ग्रंथों के अनुसार, एक जंगल में एक गरीब शिकारी रहता था. वह अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए जंगली जानवरों का शिकार करता था. शिकार करने के लिए वह अक्सर एक तालाब के किनारे बेल के वृक्ष पर डेरा डालता था. एक दिन उसने देखा कि तालाब के पास ही एक बेल वृक्ष के नीचे एक शिवलिंग स्थापित है. शिकारी को यह पता नहीं था कि यह स्थान कितना पवित्र है. उसने अनजाने में उस स्थान पर ही मांस पकाया और खाया. रात के समय उसे सपने में भगवान शिव आए और उसे इस पवित्र स्थान के बारे में बताया. शिकारी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने क्षमा मांगी. भगवान शिव ने उसे बताया कि वह अगले जन्म में एक साहूकार के रूप में जन्म लेगा.

दूसरे जन्म में शिकारी वाकई एक धनी साहूकार बना. लेकिन वह पिछले जन्म के कर्मों के कारण अत्यधिक लालची हो गया. एक दिन एक गरीब आदमी उससे कर्ज लेने आया. साहूकार ने उसे कर्ज तो दे दिया, लेकिन उसने कहा कि यदि वह समय पर कर्ज नहीं चुका पाया तो उसे अपना बेटा देना होगा. गरीब आदमी समय पर कर्ज चुकाने में असमर्थ रहा. साहूकार ने उसका बेटा ले लिया और उसे अपने घर में नौकर बनाकर रख लिया.

एक दिन शिवरात्रि का पर्व आया. साहूकार के घर में सभी लोग पूजा-पाठ में व्यस्त थे, लेकिन गरीब आदमी का बेटा कुछ नहीं जानता था. उसने देखा कि घर के एक कोने में शिवलिंग रखा हुआ है. उसने पूछा कि यह क्या है और लोग क्या कर रहे हैं? साहूकार की पत्नी ने उसे बताया कि आज शिवरात्रि का पर्व है और भगवान शिव की पूजा की जाती है. गरीब आदमी का बेटा अनजाने में ही उस रात शिवलिंग के पास जागरण करने लगा.

सुबह होने पर साहूकार ने देखा कि गरीब आदमी का बेटा शिवलिंग के पास बैठा हुआ है. साहूकार को क्रोध आया और उसने गरीब आदमी के बेटे को बहुत डांटा. उसी समय

भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने साहूकार को बताया कि गरीब आदमी का बेटा दरअसल शिकारी है, जिसे पिछले जन्म में अनजाने में पवित्र स्थान पर भूल करने के कारण दंड मिला था. लेकिन उसने अनजाने में ही शिवरात्रि का व्रत रख लिया, जिसके कारण उसे मोक्ष की प्राप्ति हो गई. इसके बाद भगवान शिव अंतर्ध्यान हो गए.

यह कथा हमें बताती है कि भगवान शिव सच्ची भक्ति से बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं. मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने और पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और कर्मों का फल भी शुभ मिलता है.

निष्कर्ष

मासिक शिवरात्रि का व्रत आध्यात्मिक विकास और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है. इस व्रत को रखने से व्यक्ति को न केवल शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है, बल्कि इससे जीवन के कष्ट भी दूर होते हैं. यदि आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो मासिक शिवरात्रि का व्रत अवश्य रखें.

ध्यान दें: उपरोक्त जानकारी सामान्य ज्ञानवर्धक उद्देश्यों के लिए है. किसी भी व्रत या पूजा को करने से पहले किसी धार्मिक विद्वान से सलाह अवश्य लें.

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