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Deepdaan in Kartik Maas:कार्तिक मास में दीपदान का महत्व और इसकी शुभ विधि

हिंदू धर्म में कार्तिक मास का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे चतुर्मास का अंतिम माह माना जाता है। इस महीने को भक्ति, पूजन, जप-तप, और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास में दीपदान करने से भगवान लक्ष्मीनारायण की विशेष कृपा प्राप्त होती है, और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। खासतौर से इस माह में दीपदान करना मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का महत्वपूर्ण उपाय माना गया है। इस लेख में हम जानेंगे कि कार्तिक मास में दीपदान का क्या महत्व है और इसे सही विधि से कैसे करें।

Deepdaan in Kartik Maas

कार्तिक मास का महत्व (Significance of Deepdaan in Kartik Maas)

कार्तिक मास को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। इस माह में जप, तप, दान और स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों में वर्णन है कि इस माह में भगवान सूर्य तुला राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे सूर्य का नीच स्थान माना गया है। इस समय वातावरण में अंधकार का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए दीपक जलाना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।

इसके अलावा, कार्तिक मास में मां लक्ष्मी की आराधना विशेष रूप से की जाती है। यह माना जाता है कि इस मास में जो भी व्यक्ति दीपदान करता है, उसे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और उसके जीवन में समृद्धि का संचार होता है। साथ ही, भगवान विष्णु और शिवजी की उपासना भी इस माह में अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।

दीपदान का महत्व (Significance of Deepdaan)

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दीपक जलाने का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है। अग्निपुराण और पद्मपुराण में बताया गया है कि जो व्यक्ति मंदिरों, देवालयों, नदी किनारे और दुर्गम स्थानों पर दीपदान करता है, उसे जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। कार्तिक मास में विशेष रूप से पांच दिनों का महत्व है, जिनमें दीपदान अवश्य करना चाहिए। ये पांच दिन रमा एकादशी से दीपावली तक माने जाते हैं।

दीपदान करने से न केवल व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं। पद्मपुराण के अनुसार, जो व्यक्ति सड़कों, मंदिरों, और नदी किनारे दीप जलाता है, उसे सर्वतोमुखी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है और उसे नरक जाने से मुक्ति मिलती है।

कार्तिक मास में दीपदान के पांच विशेष दिन (Five special days of Deepdaan in Kartik Maas)

यदि आप पूरे कार्तिक मास में दीपदान नहीं कर पाते हैं, तो इन पांच विशेष दिनों में दीपदान अवश्य करना चाहिए:

  1. रमा एकादशी
  2. धनतेरस
  3. नरक चतुर्दशी
  4. दीपावली
  5. कार्तिक पूर्णिमा

इन दिनों में किया गया दीपदान अत्यधिक शुभ माना जाता है और इससे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। यह व्यक्ति के जीवन में सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करता है और उसे सुख-समृद्धि प्रदान करता है।

दीपदान की विधि (Deepdaan Vidhi)

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दीपदान की प्रक्रिया अत्यंत सरल और शास्त्रसम्मत है। इसके लिए मिट्टी, तांबा, चांदी, पीतल या सोने का दीपक लिया जा सकता है। दीपक को जलाने से पहले उसकी पूजा करनी आवश्यक है। आइए जानते हैं दीपदान की सही विधि:

  1. दीपक की तैयारी: मिट्टी के दीपक को पानी में कुछ घंटे भिगोकर सुखा लें। अगर आप धातु का दीपक इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसे अच्छी तरह साफ कर लें।
  2. सामग्री की व्यवस्था: दीपक, तेल या घी, रुई की बत्ती, चावल या गेहूं लें। दीपक में गाय के घी का दीपक या तिल के तेल का दीपक जलाना अत्यधिक शुभ माना गया है।
  3. दीपक का आसन: दीपक को जमीन पर सीधे न रखें। कालिका पुराण के अनुसार, पृथ्वी पर सीधा रखा दीपक शुभ नहीं होता। इसलिए दीपक के नीचे चावल, गेहूं, या सप्तधान्य का आसन देना चाहिए।
  4. दीपक का स्थान: एक दीपक भगवान विष्णु के समक्ष और दूसरा शिवलिंग के समक्ष रखें। भगवान के समक्ष दीपक जलाना समस्त यज्ञों के समान फलदायी माना जाता है।
  5. दीपक प्रज्वलन मंत्र: दीपक जलाते समय निम्नलिखित मंत्र पढ़ें:
    • “ॐ दीपज्योति नमस्तुते।”
  6. दीपक का प्रणाम: दीपक जलाने के बाद उसे प्रणाम करें और ईश्वर से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

दीपदान के लाभ (Deepdaan Laabh)

कार्तिक मास में दीपदान करने से अनेक आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति इस माह में श्रद्धापूर्वक दीपदान करता है, उसे अनेक जन्मों तक विष्णुभक्ति और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

  1. लक्ष्मीजी की कृपा: पद्मपुराण के अनुसार, जो व्यक्ति मंदिरों और नदी किनारे दीपदान करता है, उसे सर्वतोमुखी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है और उसका जीवन सौभाग्य से भर जाता है।
  2. स्वर्गलोक में प्रतिष्ठा: जो व्यक्ति शिवलिंग के सामने दीप जलाता है, उसे स्वर्गलोक में हजारों युगों तक प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
  3. अकाल मृत्यु से मुक्ति: दुर्गम स्थानों पर दीपदान करने से व्यक्ति नरक जाने से बच जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  4. सम्पूर्ण यज्ञों का फल: ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि जो व्यक्ति भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक जलाता है, उसे सम्पूर्ण यज्ञों के समान फल की प्राप्ति होती है और वह हरिधाम में स्थान पाता है।

कार्तिक मास का दीपदान अत्यधिक शुभ और फलदायी माना गया है। यह न केवल धार्मिक आस्थाओं को प्रकट करता है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाता है। इस महीने में भगवान विष्णु और शिवजी के समक्ष दीप जलाने से व्यक्ति को जीवन में सौभाग्य, लंबी आयु और सभी प्रकार की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। कार्तिक मास के विशेष दिनों में दीपदान अवश्य करना चाहिए, ताकि जीवन में लक्ष्मीजी की कृपा बनी रहे और समस्त कष्टों का निवारण हो सके।

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