नवरात्रि के नौ दिनों तक व्रत रखने के बाद, भक्त कन्या भोज करवाकर और कन्या पूजन करके व्रत का समापन करते हैं। कुछ लोग अष्टमी तिथि को कन्या पूजन करते हैं, जबकि कुछ नवमी तिथि को यह अनुष्ठान संपन्न करते हैं। इस वर्ष, नवरात्रि में एक दिन कम होने के कारण, कन्या पूजन की सही तिथि को लेकर लोगों में संशय बना हुआ है। आइए जानते हैं कि कन्या पूजन कब करना उचित रहेगा, साथ ही इसके शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में भी जानकारी प्राप्त करें।

नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। जो भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, उनके लिए शास्त्रों में कन्या पूजन अनिवार्य बताया गया है। व्रत के समापन पर कन्या पूजन करने से ही इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है और मां भगवती की कृपा मिलती है। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि कन्याओं को मां भवानी का स्वरूप माना जाता है।
इस पूजन से भक्तों को विशेष लाभ प्राप्त होता है और उनके सभी अधूरे कार्य पूरे होने का मार्ग खुलता है। इस वर्ष, चैत्र नवरात्रि आठ दिनों की होने के कारण अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में, पंचांग के अनुसार सही तिथि पर कन्या पूजन कब और कैसे किया जाना चाहिए, आइए जानते हैं।
कन्या पूजन कब करें (Chaitra Navratri 2025 Kanya Pujan Date)
कन्या पूजन का समय (Chaitra Navratri 2025 Kanya Pujan Time)
चैत्र नवरात्रि महाष्टमी के दिन कन्या पूजन का शुभ समय 5 अप्रैल को सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा। वहीं, राम नवमी पर कन्या पूजन का अभिजीत मुहूर्त 6 अप्रैल को सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक रहेगा।
नवरात्रि में देवी आराधना जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतना ही अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है। नौ दिनों के उपवास के बाद कन्या पूजन करने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इससे जीवन में सुख-समृद्धि, धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से, अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने से भक्तों को अद्भुत फल की प्राप्ति होती है।
कन्या पूजन का महत्व (Kanya Pujan Mahatva)
नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। जो भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, उनके लिए शास्त्रों में कन्या पूजन अनिवार्य बताया गया है। व्रत के समापन पर कन्या पूजन करने से ही इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है और मां भगवती की कृपा मिलती है। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि कन्याओं को मां भवानी का स्वरूप माना जाता है।
इस पूजन से भक्तों को विशेष लाभ प्राप्त होता है और उनके सभी अधूरे कार्य पूरे होने का मार्ग खुलता है। इस वर्ष, चैत्र नवरात्रि आठ दिनों की होने के कारण अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में, पंचांग के अनुसार सही तिथि पर कन्या पूजन कब और कैसे किया जाना चाहिए, आइए जानते हैं।
कन्या पूजन मंत्र (Kanya Pujan Mantra)
स्तोत्र मंत्र:
“या देवी सर्वभूतेषु कन्या रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
बीज मंत्र:
“ॐ श्री दुं दुर्गायै नमः।”
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