पापमोचनी एकादशी, हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। यह मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष में पड़ती है। इस पवित्र दिन को भगवान विष्णु को समर्पित किया जाता है और माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को अपने सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। आइए, इस लेख में हम पापमोचनी एकादशी के महत्व, तिथि, पौराणिक कथा, व्रत विधि और नियमों के बारे में विस्तार से जानें।

पापमोचनी एकादशी क्यों मनाई जाती है? (Papmochani Ekadashi 2025)
पापमोचनी एकादशी हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष में पड़ती है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, ‘पापमोचनी’ का अर्थ है ‘पापों से मुक्ति दिलाने वाला’। इस व्रत को करने के पीछे यह मान्यता है कि व्यक्ति के द्वारा जानबूझकर या अनजाने में किए गए सभी पापों का नाश होता है।
पापमोचनी एकादशी का महत्व इस बात में निहित है कि यह आत्म-शुद्धि और पश्चाताप का एक अवसर प्रदान करती है। इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की भक्ति करने से व्यक्ति को न केवल पापों से मुक्ति मिलती है, बल्कि मोक्ष प्राप्ति की संभावना भी बढ़ जाती है।
पापमोचनी एकादशी की पौराणिक कथा (Papmochani Ekadashi Katha)
पापमोचनी एकादशी से जुड़ी एक प्रचलित कथा है, जिसमें बताया गया है कि किस प्रकार इस व्रत के द्वारा पापों से मुक्ति मिलती है।
कथा के अनुसार, एक बार भगवान यमराज ने भगवान विष्णु से पूछा कि मृत्यु के बाद व्यक्ति को अपने पापों से किस प्रकार मुक्ति मिल सकती है। भगवान विष्णु ने उन्हें बताया कि मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अपने सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
कथा आगे चलकर एक मेधावी ऋषि और एक अप्सरा के बारे में बताती है। मेधावी ऋषि भगवान शिव की कठिन तपस्या कर रहे थे। एक दिन एक अप्सरा उनके सामने आई और ऋषि उस अप्सरा के मोह में फंसकर अपनी तपस्या भंग कर बैठे। इसके कारण ऋषि को क्रोध आया और उन्होंने उस अप्सरा को श्राप दे दिया कि वह पिशाचिनी बन जाए। अपने किए पर पछताते हुए अप्सरा ऋषि के चरणों में गिर पड़ी और उनसे श्रापमुक्ति का उपाय पूछा।
ऋषि ने उसे बताया कि वह चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली पापमोचनी एकादशी का व्रत करे, जिससे उसे अपने पापों से मुक्ति मिल जाएगी। अप्सरा ने वैसा ही किया और पापमोचनी एकादशी के व्रत के प्रभाव से वह पिशाच के रूप से मुक्त हो गई।
यह कथा इस बात को दर्शाती है कि पापमोचनी एकादशी का व्रत कितना फलदायी होता है। चाहे कोई भी पाप हो, इस व्रत के द्वारा उसका नाश किया जा सकता है।
पापमोचनी एकादशी तिथि ( Papmochani Ekadashi Date and Time 2025 )
मार्च माह की कृष्ण पक्ष एकादशी को पापमोचनी एकादशी या वैष्णव पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। यह तिथि 25 मार्च 2025 को सुबह 5:05 बजे शुरू होगी और 26 मार्च 2025 को तड़के 3:45 बजे समाप्त होगी।
पापमोचनी एकादशी का व्रत कैसे रखें?
पापमोचनी एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- दशमी तिथि की तैयारी: दशमी तिथि को सूर्यास्त के बाद सात्विक भोजन करें। इसके बाद पापमोचनी एकादशी का व्रत रखने का संकल्प लें।
- एकादशी तिथि की पूजा: एकादशी तिथि के सुबह जल्दी उठें और स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहन लें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करें और एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान विष्णु को फल, फूल, धूप, दीप और तुलसी अर्पित करें। इसके बाद उनकी आरती करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- द्वादशी तिथि का पारण: द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें। पारण करने से पहले भगवान विष्णु का धन्यवाद करें और फिर सात्विक भोजन ग्रहण करे, भोजन आरंभ करने से पहले एक निवाला ईश्वर के नाम पर निकल कर अलग रखे पारण हो जाने के बाद निकले हुए पहले निवाले को किसी ऐसी स्वच्छ जगह रखे जहां से कोई चिड़िया या पशु ग्रहण कर सके।
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