रंगभरी एकादशी, जिसे आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत और उत्सव का दिन होता है। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2024 में रंगभरी एकादशी 20 मार्च, बुधवार को पड़ेगी। आइए, इस लेख में हम रंगभरी एकादशी से जुड़ी तिथि, महत्व, पौराणिक मान्यताएं, करने योग्य और निषिद्ध कार्यों के बारे में विस्तार से जानें। साथ ही पूजा विधि और व्रत के नियमों को भी समझें।

रंगभरी एकादशी का शुभ मुहूर्त (2024)
रंगभरी एकादशी के शुभ मुहूर्त की बात करें तो इस वर्ष एकादशी तिथि का प्रारंभ 20 मार्च, बुधवार को सुबह 12 बजकर 21 मिनट से होगा और इसका समापन 21 मार्च, गुरुवार को सुबह 2 बजकर 22 मिनट पर होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष रंगभरी एकादशी पर रवि योग और पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। रवि योग बुधवार सुबह 6 बजकर 25 मिनट से लेकर रात के 10 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। पुष्य नक्षत्र का प्रारंभ सूर्योदय से लेकर सुबह 10 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।
रंगभरी एकादशी का धार्मिक महत्व
रंगभरी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। आइए जानें इसके प्रमुख धार्मिक महत्वों के बारे में:
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना: रंगभरी एकादशी का दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को इन दोनों देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- पापों से मुक्ति: रंगभरी एकादशी को पापों से मुक्ति का दिन भी माना जाता है। इस दिन सच्चे मन से व्रत रखने और पूजा करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और शुभ कर्मों का मार्ग प्रशस्त होता है।
- आध्यात्मिक उन्नति: रंगभरी एकादशी को आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और भक्ति भाव से पूजा करने से व्यक्ति का मन शांत होता है, एकाग्रता बढ़ती है और आध्यात्मिक विकास में सहायता मिलती है।
रंगभरी एकादशी की पौराणिक मान्यताएं
रंगभरी एकादशी से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। आइए, इनमें से दो प्रमुख कथाओं को जानें:
- विष्णु-लक्ष्मी विवाह: एक कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु का विवाह माता लक्ष्मी के साथ हुआ था। इस विवाह समारोह में देवताओं ने खुशी मनाते हुए रंगों की वर्षा की थी। इसलिए इस दिन को रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है।
- शिव-पार्वती का गौना: एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह के उपरांत उन्हें अपने निवास काशी ले जाने का निर्णय लिया। इसी दिन माता पार्वती का गौना हुआ था। काशीवासियों ने माता पार्वती के स्वागत में खुशी व्यक्त करते हुए एक-दूसरे पर रंग डाले थे। तभी से काशी में रंगभरी एकादशी से होली का पर्वारंभ माना जाता है।
रंगभरी एकादशी के दिन क्या करें?
सुबह जल्दी उठें:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को फूल, फल, मिठाई, और दीप अर्पित करें।
- ॐ नमो नारायणाय मंत्र का जाप करें।
- आरती करें और प्रसाद वितरित करें।